Friday, 18 September 2009

ये जादू भी न .. कम मजेदार कला नहीं

कल मुझे अलबेला खत्री जी की टिप्‍पणी मिली है , जिसमें उन्‍होने लिखा है कि मैं सभी पाठकों को ज्‍योतिषी बनाकर ही छोडूंगी। यह बात पहले भी कई पाठक कह चुके हैं। सभी पाठकों को ज्‍योतिषी बनने में भले ही कुछ समय और लगे , पर देर से ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ में पदार्पण करनेवाले अलबेला खत्री जी सबसे पहले ज्‍योतिषी बन चुके हैं , क्‍यूकि कल उनके द्वारा की गयी भविष्‍यवाणी बिल्‍कुल सही हुई है। मुझसे उन्‍होने पूछा है कि मैं जादूगर तो नहीं ? तो पाठकों को मैं बताना चाहूंगी कि अपने जीवन में कुछ दिनों तक जादू दिखाने का भी चस्‍का रहा मुझे। अपने जादू दिखाने की लिस्‍ट में से सबसे आसान और सबसे कठिन जादू के ट्रिक आपके लिए पेश कर रही हूं। आप भी ऐसी जादू कर सकते हैं।

सबसे आसान जादू को दिखाने से पहले तैयारी के लिए आपको अपने रूमाल के किनारे मोडे गए हिस्‍से में सावधानीपूर्वक एक माचिस की तिली डालकर छोड देनी है। जहां दो चार दोस्‍त जमा हों , वहां आप जादू दिखाने के लिए अपने उसी रूमाल को बिछा दें। अपने किसी दोस्‍त को उस स्‍माल में एक माचिस की तिली रखने को कहें। अब माचिस को कई तह मोडते वक्‍त आप ध्‍यान देते हुए उस तिली को छुपाकर और अपनी रूमाल के किनारे छिपायी तिली को सामने रखें। अपने दोस्‍त को अपने तिली को तोडने को कहे , इसके दो नहीं , चार छह टुकडे करवा लें । जब दोस्‍त को तसल्‍ली हो जाए कि तिली अच्‍छी तरह टूट चुकी है , तब आप रूमाल को झाड दें , साबुत तिली आपके सामने होगी। आपकी जादूगिरी देखकर दोस्‍त प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे।

हाल फिलहाल तो विज्ञान के प्रवेश से जादू के क्षेत्र में भी बहुत अधिक विकास हुआ है , पर पारंपरिक जादू में सबसे बडा जादू बच्‍चे के सर काटकर उसे जोडने का दिखाया जाता था। उसमें हाथ की अधिक सफाई की जरूरत होती थी। चादर को झाडकर बच्‍चे को सर से पांव तक ढंकते वक्‍त एक गोल तकिया और तरल लाल रंग का पैकेट अंदर भेज देना पडता था , उसके बाद बाहर के व्‍यक्ति के कहे अनुसार लडके का हर क्रिया कलाप होता था और जिस समय सर धड से अलग करने का समय होता , उससे पहले वह अपने शरीर को सिकोडकर छोटा कर लेता और सर के जगह गोल तकिया रखकर रंग के पैकेट को खोल देता । जब लोगों के अनुरोध पर उसके सर जोडने की बात होती है, वह तकिए और पैकेट को चादर में छुपाते हुए उठ खडा होता था।

जादूगर को जादू दिखाते देख हमें अचरज इसलिए होता है , क्‍यूंकि हम नहीं जानते कि उसने किस ट्रिक का इस्‍तेमाल किया है। प्राचीन काल में जब प्रकृति के निकट रहनेवाले युग में खाने पीने और रहने के अलावे न तो खर्च था और न ही महत्‍वाकांक्षा , तो यह बात मानी नहीं जा सकती कि जादूगरों ने पैसे कमाने के लालच में जनता को उनके द्वारा की जानेवाली हाथ की सफाई की जानकारी नहीं दी हो । बडा कारण यही माना जा सकता है कि यदि वे लोगों को अपने ट्रिक की जानकारी दे देतें , तो इससे लोगों के मनोरंजन का यह साधन समाप्‍त हो जाता । और जब इस कला का कोई महत्‍व ही नहीं रह जाएगा , तो फिर इसका दिनोदिन विकास भी संभव नहीं था । यही सब कारण था कि जादू की तरह ही हर कला की पीढी दर पीढी संबंधित परिवार में ही सुरक्षित रहने की परंपरा बन गयी।

वास्‍तव में , लोगों ने जब समाज बनाकर रहना शुरू किया तो पाया कि किसी एक वर्ग द्वारा उपजाए जानेवाले अनाज से सिर्फ उनके परिवार का ही नहीं , बहुतों का गुजारा हो सकता है , तो सारे लोगों का खेती में ही व्‍यस्‍त रहना आवश्‍यक नहीं। इस कारण हर क्षेत्र के विशेषज्ञों को अपनी अपनी प्रतिभा के अनुसार अलग अलग काम सौंप दिए गए और उनके खाने , पीने और अन्‍य आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने की जिम्‍मेदारी खेतिहरों को दी गयी। इसी से समाज में इतने वर्ग बन गए और पीढी दर पीढी सभी अलग अलग प्रकार के कार्यों में जुट गए । खेतिहरों द्वारा सामान्‍य कलाकारों को भी पूरी मदद मिलने के कारण ही प्राचीन काल में कला का इतना विकास हो सका , वरना आज कला के क्षेत्र में बिना विशिष्‍टता के आप जुडे , तो दो वक्‍त का भोजन जुटाना भी मुश्किल है । इसके अतिरिक्‍त प्राचीन काल में सभी कलाओं , सभी क्षेत्रों के लोगों को महत्‍व देने और समाज में परस्‍पर सहयोग की भावना को जागृत करने के लिए ही विभिन्‍न तरह के कर्मकांड की व्‍यवस्‍था भी की गयी । पर इतने अच्‍छे लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए समाज के लोगों के किए गए विभाजन का आज हम यत्र तत्र बुरा ही परिणाम देखने को मजबूर हैं।

16 comments:

हेमन्त कुमार said...

किसी भी मैजिक के पीछे कोई न कोई तकनीक होती है ।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अब मेरे धंधे पानी का जुगाड़ हो गया...मेरे लिए इतना जादू ही काफी है :)

Mithilesh dubey said...

बहुत खुब संगीता जी (मै आपको नाम से पुकार रहा हूँ उसके लिए माफि चाहुगाँ शायद यह मुझे नही करना चाहिए क्योंकी मै आपके बेटे समान हूँ) लाजवाब लेख रहा आपका ये, आपने जादुगारी के कुछ आसान नुख्से भी सिखा दिये फोकट में। बहुत-बहुत आभार आपका।

Ishwar said...

अब तो मे भी कुछ जादू सिख गया हु,
धन्यवाद

mehek said...

aare aapko jadu bhi aata hai:)waah,bahut h iachhe tricks bataye hai,jarur try karenge:).

विनोद कुमार पांडेय said...

अभी देखते रहिए संगीता जी..बहुत सारे ब्लॉगर ज्योतिष् शुरू करने वाले है..

निर्मला कपिला said...

आपका पूरा जादू हम पaर पहले ही चल चुका है अब तो माशा अल्लाह बधाई

Mishra Pankaj said...

पहले मेले में मै भीबहुत पैसे खराब किया है इस तरह के जादू लिखने में और सीख भी लिया हूँ

अन्तर सोहिल said...

वाह
और ट्रिक्स भी सिखाईयेगा मजा आ रहा है
घर जाकर बच्चों को शो दिखाऊंगा

प्रणाम स्वीकार करें

राज भाटिय़ा said...

संगीता जी ,्थोडे ओर जादू के तरीके सीखा दे, फ़िर इन गोरो को लुटता हुं;)
बहुत मजेदार बात बताई आप ने

रंजना [रंजू भाटिया] said...

तेरा जादू चल गया :) लेख बहुत पसंद आया यह ..बढ़िया

AlbelaKhatri.com said...

बहुत अच्छा लगा...

संगीता जी आपको हार्दिक बधाई
लेकिन आपने
मेरी टिप्पणी से यह पोस्ट बनाई
इसलिए
इस पर जितनी टिप्पणियां आई
उनमे से आधी मुझे दे देना
वरना हो जायेगी अपनी लड़ाई ..........हा हा हा हा

ये धमकी नहीं है ,,भविष्यवाणी है ....हा हा हा

शेफाली पाण्डे said...

संगीता जी छोटी - मोटी भविष्यवानियाँ मैं भी कर लेती हूँ ...मैंने पहले ही बता दिया था कि राखी सावंत किसी से शादी नहीं करेगी ....

cmpershad said...

आदरणीया, पहले आप यह बता दें कि आप कितनी कलाएं जानती है, उसके बाद यह निर्णय लेना सरल हो जाएगा कि आप कितनों में दक्ष हैं:) आपके ज्ञान को नमन॥

Fauziya Reyaz said...

mujhe laga ki main television par koi magical show dekh rahi hoon...

sudarshan said...

sangeeta ji mera lekh aapko achha laga iske liye dhanyawad, asha hai aap aage bhee meri hausla afjai kartee rahenge

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