Tuesday, 15 December 2009

हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे !!

बीज तो हर दिमाग में होते हैं , पर समय पर ही उनकी देखभाल हो पाती है , अंकुरण हो पाता है , विकास के क्रम में उन्‍हें हर प्रकार का वातावरण मिल पाता है और वह छोटा सा बीज एक विशाल वृक्ष बन पाता है। आज के सामाजिक राजनीतिक हालत में अनेको दिमाग के बीज दिमाग में ही सोए पडे रह जाते हैं और अनेको प्रकृति की मार से मौत के मुंह में भी चले जाते हैं। मैं आशा करती हूं कि हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे , ताकि हमारे चारो ओर विशाल ही विशाल वृक्ष नजर आए , सभी अपनी अपनी विशेषताओं की घनी पत्तियों से छांव , सुगंधित पुष्‍पों से वातावरण में सुगंध और मीठे फलों से लोगों को असीम तृप्ति प्रदान करे।

प्रकृति के सहयोग प्राप्‍त होने से बहुत लोग मेहनत और आवश्‍यकता से बहुत अधिक प्राप्‍त कर रहे होते हैं , इन्‍हें अपने सामर्थ्‍य का उपयोग दूसरों की असमर्थता को दूर करने में करना चाहिए , क्‍यूंकि प्रकृति पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता कि आज वो आपका साथ दे रही है और संयोग से आपके काम बनते जा रहे हैं , तो कल भी आपकी यही स्थिति होगी। कभी भी आपको किसी और की आवश्‍यकता पड सकती है। किसी की मदद करते समय इस बात का भी ध्‍यान रखें कि उसे बार बार मदद करने की आवश्‍यकता न पडे , उसे इस प्रकार की मदद करें  कि आनेवाले दिनों में वो इतना मजबूत हो सके कि वो पुन: दो चार लोगों की मद कर उन्‍हें भी इस लायक बना सके कि वो दूसरों की मदद कर सके।

मेरे ख्‍याल से हमारी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए कि वह आनेवाली पीढी को शारीरिक , आर्थिक , मानसिक , नैतिक और आध्‍यात्मिक दृष्टि से अधिक से अधिक मजबूत बनाती चली जाए। इनमें किसी का भी महत्‍व आनेवाले समय में कम नहीं होता है। इनकी मजबूती हमें हर परिस्थिति में खुशी से जीना सीखा देती है, जो मस्तिष्‍क में किसी प्रकार का तनाव कम करने में सहायक है।





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