सकारात्मक का मतलब क्या होता है, सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या है, सकारात्मक सोच कैसे बनाये, सकारात्मक सोच के फायदे क्या हैं, सकारात्मक सोच के उपाय क्या कर सकते हैं, खुद को, दिमाग को पॉजिटिव कैसे रखें - कुल मिलाकर इस ब्लॉग में पॉजिटिव थिंकिंग टिप्स यानि सकारात्मक सोच पर निबंध और सकारात्मक दृष्टिकोण मिलेगा आपको !
Tuesday, 2 February 2021
सरस्वती पूजा पर आज तो बस पुरानी यादें ही साथ हैं !!
Wednesday, 13 May 2020
सनातन धर्म का पालन करना चाहिए
Sanatan Dharma in Hindi
सनातन धर्म का पालन करना चाहिए
पता नही क्यूं , अंधविश्वासी स्वभाव नहीं होने के बावजूद प्राचीन परंपराएं मुझे बुरी नहीं लगती , धर्म मुझे बुरा नहीं लगता । क्यूंकि मैं मानती हूं कि विदेशी आक्रमणों के दौरान हमारी सभ्यता और संस्कृति का जितना विनाश हुआ , उससे कहीं कम इस स्वतंत्र भारत में धर्म के क्षेत्र में घुसकर कमाने खाने वाले चोर डाकुओं ने नहीं किया। इस कारण धर्म का जो भी रूप हमारे सामने है , हम जैसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखनेवालों को पच ही नहीं सकता।
पर धर्म तो धारण करने योग्य व्यवहार होता है , उससे हम कब तक दूर रह सकते हैं , आज हमें धर्म के पालन के लिए नए नियम बनाने की आवश्यकता है। आज हर क्षेत्र में झूठ और अन्याय का बोलबाला है , क्या हम हर क्षेत्र को ही समाप्त कर सकते हैं ? सबमें सुधार की आवश्यकता है , पर बस हम सिर्फ दोषारोपण करते रहें , तो बात सुधरनेवाली नहीं। यही कारण है कि जब भी मैं धर्म विरोधियों के आलेख देखती हूं , मैं उसमें कमेंट दिए बिना नहीं रह पाती , दो दिन पूर्व भी धर्म और ईश्वर के विरोध में लिखे गए एक आलेख में मैने ये कमेंट कर दिया है .............
sanatan dharm ke niyam(सनातन धर्म के बारे में )
ईश्वर को किसी ने देखा नहीं .. इसलिए इसे मानने की जबरदस्ती किसी पर नहीं की जा सकती .. पर हजारो हजार वर्षों से बिना संविधान के .. बिना सरकार के यदि यह समाज व्यवस्थित ढंग से चल रहा है .. तो वह धर्म के सहारे से ही .. यदि भाग्य, भगवान और स्वर्ग नरक का भय या लालच न होता .. तो समर्थों के द्वारा असमर्थों को कब का समाप्त कर दिया जाता .. शरीर और दिल दोनो से कमजोर नारियों की रक्षा अभी तक धर्म के कारण ही हो सकी है .. बुद्धि , बल और व्यवसायिक योग्यता में से कुछ भी न रखनेवालों को भी रोजगार के उपाय निकालकर उनके रोजी रोटी की व्यवस्था भी धर्म के द्वारा ही की गयी थी .. गृहस्थों को इतने कर्मकांडों में उलझाया जाता रहा कि दीन हीनों को कभी रोजगार की कमी न हो .
How old is Sanatan Dharma
(sanatan dharm kitna purana hai)
मनुष्य की अंतरात्मा से सम्बन्ध है इसका, इसलिए तो सनातन धर्म की उम्र नहीं बताई जा सकती। दूनिया के हर धर्म में समय समय पर साफ सफाई की आवश्यकता रहती थी .. पर इसका परिशोधन न कर हम अपनी परंपराओं को , अपने धर्म को गलत मानते रहे .. तो आनेवाले युग में भयंकर मार काट मचेगी .. आज ही पैसे कमाने के लिए कोई भी रास्ता अख्तियार करना हमें गलत नहीं लगता .. क्यूंकि किसी को भगवान का भय नहीं रह गया है .. जो बहुत बडे वैज्ञानिक हैं .. क्या उनके वश में सबकुछ है .. वे भगवान को माने न माने पकृति के नियमों को मानना ही होगा .. और मैं दावे से कहती हूं कि इस प्रकृति में कुछ भी संयोग या दुर्योग नहीं होता है .. हमारे एक एक काम का लेखा जोखा है प्रकृति के पास .. और जब हर व्यक्ति इस बात को समझ जाएंगे .. ये दुनिया स्वर्ग हो जाएगी .. मेरा दावा है !!
Tuesday, 12 May 2020
धर्म का पालन अंधविश्वास बिल्कुल भी नहीं !!
Dharm kya hai
धर्म का पालन अंधविश्वास बिल्कुल भी नहीं !!
कल मैने आप सबों को एक लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की कि किस तरह आध्यात्म , धर्म , अंधविश्वास और जादू टोना एक दूसरे से अलग हैं। युग के परिवर्तन के साथ ही साथ धर्म की परिभाषा बदलने लगती है। आज के विकसित समाज में भी परिवार में हर सुख या दुख के मौके की वर्षगांठ मनायी जाती है , इसके माध्यम से हम खुशी या दुखी होकर आपनी भावनाओं का इजहार कर पाते हैं , जिन माध्यमों से हमे या हमारे परिवार को सुख या दुख मिल रहा हो , उसे याद कर पाते हैं , उनके प्रति नतमस्तक हो पाते हैं।
एक पूरे समाज में मनाए जानेवाले किसी त्यौहार का ही संकुचित रूप है ये , पर जब किसी की उपस्थिति और अनुपस्थिति पूरे समाज पर प्रभाव डाल रही हो , तो वैसे महान व्यक्ति का जन्मदिन या पुण्य तिथि पूरा समाज एक साथ मनाता है। यह हमारा कर्तब्य है , हमें मनाना चाहिए , पर इसे मनाने न मनाने से उन महान आत्माओं के धर्म में कोई परिवर्तन नहीं होगा। उनका काम कल्याण करना है , तो वे अपने धर्म के अनुरूप कल्याण ही करते रहेंगे। पर उन्हें याद कर हमें उनके गुणों से सीख लेने की प्रेरणा अवश्य मिल जाती है।
प्राचीन काल के संदर्भ में हम इसी बात को देखे तो आग , जल , वायु , सूर्य से लेकर प्रकृति की अन्य वस्तुओं में एक मनुष्य की तुलना में कितनी गुणी अधिक शक्ति है , इसकी कल्पना करना भी नामुमकिन है। आग हमें जला भी सकती है , पर ऐसा विरले करती , वह हमें गर्म रखने से लेकर हमारे लिए स्वादिष्ट खाना बनाने की शक्ति रखती है। जल हमें अपने आगोश में ले सकते हैं , पर वे ऐसा नहीं करते और हमारे जीवन यापन के हर पल में सहयोग करते हैं। वायु हमें कहां से उडाकर कहां तक ले जा सकती है , पर वो ऐसा नहीं करती , हमारे प्राण को बचाए रखने के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम करती है। सूर्य हमें जलाकर खाक कर सकता है , पर हमारी दिनचर्या को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन उदय और अस्त होता है। ये सब इसलिए होता है , क्यूंकि कल्याण करना उनका स्वभाव है।
हम प्रकृति की वस्तुओं के इसी स्वरूप की पूजा करते हैं । पूजा करने के क्रम में हम इनको सम्मान तो देते ही हैं , उनसे सीख भी लेते हैं कि हम अपने गुणों से संसार का कल्याण करेंगे। प्रकृति के एक एक कण में कुछ न कुछ खास विशेषताएं हैं , जो हमारी सेवा में तत्पर रहती हैं। यदि हम ढंग से प्रयोग करें , तो फूल से लेकर कांटे तक और अमृत से लेकर विष तक , सबमें किसी न किसी प्रकार का फायदा है। हर वर्ष का एक एक दिन हमने इनकी पूजा के लिए निर्धारित किया है , ताकि हम इनके गुणों को याद कर सके और इनसे सीख ले सकें। इसलिए इसे हमारे धर्म से जोडा गया है। यदि इस ढंग से सोंचा जाए कि हम इनकी पूजा नहीं करेंगे यानि इसका दुरूपयोग करेंगे , तो इनके सारे गुण अवगुण में बदल जाएंगे यानि तरह तरह की प्राकृतिक आपदाएं आएंगी , तो यह अंधविश्वास नहीं हकीकत ही है।

